शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

जिंदगी मैं तेरे तराने लिख रहा हूँ

बीते पलों के अफ़साने लिख रहा हूँ।
जिंदगी मैं तेरे तराने लिख रहा हूँ॥
हालत कुछ यूँ कि वक्त काटे नहीं कटता,
वक्त काटने के बहाने लिख रहा हूँ॥
नदिया किनारे, पेड़ों की छाँव में,
देखे थे जो सपने सुहाने लिख रहा हूँ॥
हँसते-खेलते, अठखेलियाँ करते,
खूबसूरत गुज़रे ज़माने लिख रहा हूँ॥
धुंधली ना पड़ जाएँ यादें हमारी,
नयी कलम से गीत पुराने लिख रहा हूँ॥
जिसके गवाह थे वो झुरमुट, वो झाड़ियाँ,
तेरे-मेरे प्यार की दास्तानें लिख रहा हूँ॥

शनिवार, 1 जनवरी 2011

नवल वर्ष तेरा अभिनन्दन हो!

नवल वर्ष तेरा अभिनन्दन हो!

नवल चेतना, नवल सृजन हो,
मंजुल मंगल परिवर्तन हो,
नवल वर्ष की मधुर छाँव में
पुलकित प्रमुदित जन-जीवन हो!
नवल वर्ष तेरा…………………(१)

नवल राह हो, नवल चाह हो,
नवल सोच हो, नव उछाह हो,
नवल भावना, नवल कामना
नवल कर्म, नव जागृत मन हो!
नवल वर्ष तेरा…………………(२)

नव गिरि-कानन, गगन नवल हो,
नवल पवन हो, चमन नवल हो,
मानवता की नवल पौध हो,
और नवल जीवन-दर्शन हो!
नवल वर्ष तेरा…………………(३)

- राजेश मिश्र

जीवन चौथेपन में दुष्कर

जीवन चौथेपन में दुष्कर, धीरज धरना पड़ता है। मरने से पहले वर्षों तक घुट-घुट मरना पड़ता है।। दुखित व्यक्ति का साथ जगत् में किसको ईप्सित होता ह...