गुरुवार, 30 नवंबर 2017

हमारा प्यारा गाँव

मैं
तुम
निकले
शहर को
तकता रहा
जाते युवाओं को
हमारा प्यारा गाँव.

मैं
तुम
रहते
शहर में
बाट जोहता
बूढ़ी सूनी आँखों
हमारा प्यारा गाँव.

राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।