रविवार, 12 अप्रैल 2026

राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं,
किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं।
पातकी घोरतम नाम ही ले तरें,
कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।

रविवार, 5 अप्रैल 2026

कौन अपना है जगत में?

कौन अपना है जगत में, जब जगत अपना नहीं?
स्वप्न को सच मानने से, सत्य हो सपना नहीं।।

जगत में आना अकेला
जगत से जाना अकेला 
जन्म से ले मृत्यु तक की
अवधि केवल एक मेला

दृष्टिभ्रम झूठा झमेला, मान सच फँसना नहीं।
स्वप्न को सच मानने से, सत्य हो सपना नहीं।।१।।

स्वार्थ के संबंध सारे 
स्वार्थ पर यह जग टिका
अधिक या कम मोल, लेकिन 
है यहाँ सब कुछ बिका

सज गया बाजार में जो, वह कभी अपना नहीं।
स्वप्न को सच मानने से, सत्य हो सपना नहीं।।२।।

कर्मफल पूँजी-प्रतिष्ठित
यह जगत व्यापार है
सकल सुख-दुख का यहाँ पर
कर्म ही आधार है 

जो मिला सब कुछ तुम्हारा, और पर मढ़ना नहीं।
स्वप्न को सच मानने से, सत्य हो सपना नहीं।।३।।

- राजेश मिश्र

माँ! धरा का धीर है तू

दुःख-आतप तप्त जग में छाँव घन, मृदु नीर है तू। माँ! धरा का धीर है तू।। वेद-विद् कहते सदा से जीव ईश्वर अंश है यह ईश्वरी! तुझसे सृजित ही जगत का...