शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

मैं सभी कुछ लुटाकर लुटेरा बना

हर अँधेरी निशा का सवेरा बना।
मैं सभी कुछ लुटाकर लुटेरा बना।।

दैव ने उस दुखद मोड़ पर ला दिया, 
तू न मेरी बनी, मैं न तेरा बना।।

दोष उनको निराश्रित किया लग रहा
जिन खगों का हमेशा बसेरा बना।

मार्ग पर दूसरों को उजाला दिया,
पर स्वयं उम्र भर इक अँधेरा बना।।

बस न पाया किसी के हृदय में कभी,
सर्वदा दुःख का घन घनेरा बना।।

घाव इतने मिले जिंदगी में मुझे,
दर्द ही जिंदगी का चितेरा बना।।

- राजेश मिश्र

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