बुधवार, 5 अगस्त 2026

हे लखन! उठो प्रिय भ्रात

हे लखन! उठो प्रिय भ्रात
प्रात अब होने वाली है।।

शयित उषा-दृग खुलने वाले लाली छाती होगी।
पुरखों का आशीष समेटे किरणें आती होंगी।

बीती घन काली रात 
प्रात अब होने वाली है।
हे लखन! उठो प्रिय भ्रात
प्रात अब होने वाली है।।१।।

 विहग-वृन्द उद्यत उड़ने को निज-निज पङ्ख पसारे।
उठो वत्स! अब निद्रा त्यागो मेरे प्राण-अधारे।

टाली कब मेरी बात 
प्रात अब होने वाली है।
हे लखन! उठो प्रिय भ्रात
प्रात अब होने वाली है।।२।।

शत्रु सैन्य आती ही होगी अब झटपट उठ जाओ। 
वानर-भालु हतोत्साहित हैं उठ उत्साह बढ़ाओ

मेटो सबका सन्ताप 
प्रात अब होने वाली है।
हे लखन! उठो प्रिय भ्रात
प्रात अब होने वाली है।।१।।

- राजेश मिश्र

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हे लखन! उठो प्रिय भ्रात

हे लखन! उठो प्रिय भ्रात प्रात अब होने वाली है।। शयित उषा-दृग खुलने वाले लाली छाती होगी। पुरखों का आशीष समेटे किरणें आती होंगी। बीती घन काली ...