मंगलवार, 9 अप्रैल 2024

अब तो दरस दिखाओ मेरी मैया

अब तो दरस दिखाओ मेरी मैया।

प्यासे नयन तकें बरसों से ,
आकर प्यास बुझाओ मेरी मैया।
अब तो दरस…

हरि-हर-ब्रह्मा, सुर-मुनि सेवें,
सेवा भाव जगाओ मेरी मैया।
अब तो दरस…

कनक कलेवर, लाल चुनरिया,
माँग सिंदूर सजाओ मेरी मैया।
अब तो दरस…

टीका, कुण्डल, मोती सोहे,
चंद्रवदन दरसाओ मेरी मैया।
अब तो दरस…

पुष्प- हार, असि-खप्पर धारी,
सिंह चढ़ी चलि आओ मेरी मैया।
अब तो दरस…

रक्तबीज, महिषासुर घाती,
स्वजन कृपा बरसाओ मेरी मैया।
अब तो दरस…

काम, क्रोध, मद, लोभ, शोक सँग,
मत्सर, मोह मिटाओ मेरी मैया।
अब तो दरस…

 - राजेश मिश्र 

राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।