रहना मुश्किल बिना तुम्हारे, छोड़ हमें क्यों जाती हो?
बिल तो हम पूरा देते हैं, टाइम पर भर आते हैं,
फिर भी क्यों तुम गाल फुलाकर धड़कन सदा बढ़ाती हो?
तुम बिन वाई-फाई, पंखे, एसी सब मर जाते हैं,
यम के जैसा प्राण सभी का निर्दय बन हर जाती हो।
कष्ट कोई तो बतला दो तुम, कही किसी ने बात कोई?
उससे हम लड़ लेंगे, यदि तुम सब कुछ हमें बताती हो!
लेकिन बार-बार हमको यूँ, फिर से छोड़ न जाना तुम,
तुम जाती, खुशियाँ ले जाती, मृत जैसा कर जाती हो।
- राजेश मिश्र
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