शुक्रवार, 5 जून 2026

और जाना है मुझे

रोकते हैं दृग-युगल पग, और जाना है मुझे।
चल न पाया एक भी डग, और जाना है मुझे।।

था बिताना पल खुशी के कुछ तुम्हारे साथ में,
तुम अभी आए यहाँ पर, और जाना है मुझे।

बात कहनी थी तुम्हें जो, अनकरी ही रह गई,
पास तुम आए झिझकते, और जाना है मुझे।

लड़ रहे थे हर लड़ाई तुम अकेले उम्र भर,
आज अब माँगा सहारा, और जाना है मुझे।

बचपने ने बस चखा है रस पिता के प्यार का,
भूख मिटने भी न पाई, और जाना है मुझे।

देखते माँ-बाप बूढ़े अश्रु भरकर आँख में,
आसरा अब बस तुम्हारा, और जाना है मुझे।

- राजेश मिश्र

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