बुधवार, 21 जनवरी 2026

जीवन चौथेपन में दुष्कर

जीवन चौथेपन में दुष्कर,
धीरज धरना पड़ता है।
मरने से पहले वर्षों तक
घुट-घुट मरना पड़ता है।।

दुखित व्यक्ति का साथ जगत् में
किसको ईप्सित होता है,
घोंट गला दुख का, हँसने का
अभिनव करना पड़ता है‌।।

वाणी के तीखे तीरों से
हत हृत् क्रंदन करता है,
नीलकंठ-सा गरल कंठ में
धारण करना पड़ता है।।

पुण्य-अपुण्य कर्म-वृक्षों पर
सुख-दुख के फल लगते हैं,
गठरी ले जाते जो जग से,
आकर भरना पड़ता है।।

कर्मबंध के कारण जग में
आवागमन सतत चलता,
मुक्ति हेतु नित मन-इंद्रिय पर 
संयम करना पड़ता है।।

- राजेश मिश्र 

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