सोमवार, 12 जनवरी 2026

मधुप मन नाच उठता है

महकती मुस्कुराहट पर मधुप मन नाच उठता है। 
तुम्हारी एक आहट पर मधुप मन नाच उठता है।।

नासिकाभरण-द्युतिमंडल,
दमकते कान के कुण्डल।
मचलते किंकिणी कंगन,
चहकती चूड़ियाँ पायल।

तनिक-सी खनखनाहट पर मधुप मन नाच उठता है।
तुम्हारी एक आहट पर मधुप मन नाच उठता है।।१।।

थिरकते अंग इतराते,
नयन मदनीय मदमाते।
त्वचा मृदु रंग सिंदूरी
केश कटि-कूल बल खाते,

दशन-दल झिलमिलाहट पर मधुप मन नाच उठता है।
तुम्हारी एक आहट पर मधुप मन नाच उठता है।।२।।

व्यथित हृत् हर्ष भर जाएँ
चित्रिणी चपल चेष्टाएँ।
गमकती गंध कस्तूरी 
रसीले बोल बिखराएँ।

खनकती खिलखिलाहट पर मधुप मन नाच उठता है।
तुम्हारी एक आहट पर मधुप मन नाच उठता है।।३।।

- राजेश मिश्र

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