जब अभावों से ग्रसित हो, देख लेना आस-पास।
वेदनाएँ देख सबकी निज व्यथा अति लघु लगेगी,
हिय तुम्हारा जब व्यथित हो, देख लेना आस-पास।
एक ही सच लोग जितने बात उतने ही तरह की,
बुद्धि जब सुनकर भ्रमित हो, देख लेना आस-पास।
इस जगत में कुछ नहीं है जो सदा सुखकर लगे,
कष्ट कोई जब अधिक हो, देख लेना आसपास।
हर समस्या हल करे कोई कभी संभव नहीं,
विपद कोई उपस्थित हो, देख लेना आस-पास।
जन्म का गन्तव्य जग में मृत्यु ही तो है सदा,
जब अघट कोई घटित हो, देख लेना आस-पास।
- राजेश मिश्र
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