सोमवार, 30 सितंबर 2024
चूम लो
दोहे
शनिवार, 28 सितंबर 2024
अवध में, आये हैं रघुराई
तन-मन हरषें, अँखियाँ बरसें,
चलहुँ दरस को भाई।
अवध में, आये हैं रघुराई।।
चहक रहे हैं पसु-पक्षी सब, कोयल मंगल गावैं।
दादुर टर-टर मंत्र उचारें, मेह नेह बरसावैं।
पवन सनन-सन चहुँ दिसि नाचत,
अति अनंद उमगाई।
अवध में, आये हैं रघुराई।।१।।
कली-कली खिल फूल हुई हैं, रंग-सुगंध बिखेरें।
धरती हरी-भरी हो मचले, मन आमोद घनेरे।
मधुकारिन् मधुपर्क बनावैं,
हरि कहुँ भोग लगाई।
अवध में, आये हैं रघुराई।।२।।
डगर-डगर मन मगन झूमतीं, ताल-नदी हरषाने।
कूप-पोखरी उमग रहे हैं, बिटप-लता हुलसाने।
धाये पुरजन, भरत-शत्रुघन,
बिह्वल तीनों माई।
अवध में, आये हैं रघुराई।।३।।
- राजेश मिश्र
गुरुवार, 26 सितंबर 2024
भारत माँ के शीलभंग की म्लेच्छों की तैयारी है
प्रिय! तू तो अति हरजाई है
बुधवार, 25 सितंबर 2024
कवि नहीं हूं
दुख तभी होगा पथिक! जब चाह होगी
मंगलवार, 24 सितंबर 2024
लक्ष्य-वेध हित चलना होगा
सोमवार, 23 सितंबर 2024
बचवा भुखाइल बा
रविवार, 22 सितंबर 2024
ईश्वर का वरदान है बेटी
शनिवार, 21 सितंबर 2024
अपनी अलकों से कह दो तुम
शुक्रवार, 20 सितंबर 2024
अब बहुत हुआ, अब और नहीं
गुरुवार, 19 सितंबर 2024
हे मोहन मुरली वाले
रविवार, 15 सितंबर 2024
बरबस समाधि लग जाती है
शनिवार, 14 सितंबर 2024
आखिर अंकुर फूट पड़ा है
शुक्रवार, 13 सितंबर 2024
पाप ई तुहार बा
सुनलऽ हमार कब तूंऽ? कइसे तुहंके रोकीं?
पाप ई तुहार बा तऽ, हम काहें भोगीं?
कब हम कहलीं तुहंसे, माई-बाप छोड़ि दऽ?
भाई-बहिनि-संगी-साथी, सबसे मुंह मोड़ि लऽ?
जिद ई तुहार रहल, तुहीं हव दोषी।
पाप ई तुहार बा तऽ, हम काहें भोगीं?
लइके तऽ कहलं नाहीं, अलगे हमके पालऽ।
सीना कऽ बोझ अपने, खुद ही संभालऽ।
अंड़सा तऽ तुहंके कइसे, उनहन के कोसीं?
पाप ई तुहार बा तऽ, हम काहें भोगीं?
अबहिन भी एतना साजन, बिगड़ल नऽ बाट।
माई-बाप हवं आखिर, भलहीं ऊ डांटं।
पंउआं पे सीस धरतऽ, राखि लिहंऽ गोदी।
पाप ई तुहार बा तऽ, हम काहें भोगीं?
- राजेश मिश्र
संगठन की शक्ति
शुक्रवार, 6 सितंबर 2024
कहो कान्हा? करोगे कैसे तुम उद्धार?
बुधवार, 4 सितंबर 2024
छू गई वह एक मृदु मुस्कान से
रविवार, 1 सितंबर 2024
उपजी न कहीं कविता मन में
जीवन चौथेपन में दुष्कर
जीवन चौथेपन में दुष्कर, धीरज धरना पड़ता है। मरने से पहले वर्षों तक घुट-घुट मरना पड़ता है।। दुखित व्यक्ति का साथ जगत् में किसको ईप्सित होता ह...
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लन्दन के हीथ्रो एअरपोर्ट से जैसे ही विमान ने उड़ान भरी, श्याम का दिल बल्लियों उछलने लगा. बचपन की स्मृतियाँ एक-एक कर मानस पटल पर उभरने लगीं और...
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बीते पलों के अफ़साने लिख रहा हूँ। जिंदगी मैं तेरे तराने लिख रहा हूँ॥ हालत कुछ यूँ कि वक्त काटे नहीं कटता, वक्त काटने के बहाने लिख रहा हूँ॥...
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मनुज स्वभाव, नहीं अचरज है। मानव हैं हम, द्वेष सहज है।। निर्बल को जब सबल सताए, वह प्रतिकार नहीं कर पाए, मन पीड़ा से भर जाता है, द्वेष हृदय घ...