शुक्रवार, 15 अगस्त 2025

स्वतंत्रता दिवस

वीरों ने निज रक्तधार से 

धरती को नहलाया।

सात समुन्दर पार पहुँचकर 

ऊधम खूब मचाया।।

खोकर पुत्र-कन्त माँ-बहनों 

ने आँसू  न बहाया‌।

छाती ताने खड़ा तिरंगा 

तब जाकर लहराया।।


- राजेश मिश्र 

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राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।