वीरों ने निज रक्तधार से
धरती को नहलाया।
सात समुन्दर पार पहुँचकर
ऊधम खूब मचाया।।
खोकर पुत्र-कन्त माँ-बहनों
ने आँसू न बहाया।
छाती ताने खड़ा तिरंगा
तब जाकर लहराया।।
- राजेश मिश्र
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