वीरों ने निज रक्तधार से
धरती को नहलाया।
सात समुन्दर पार पहुँचकर
ऊधम खूब मचाया।।
खोकर पुत्र-कन्त माँ-बहनों
ने आँसू न बहाया।
छाती ताने खड़ा तिरंगा
तब जाकर लहराया।।
- राजेश मिश्र
तुमसे भासित सूरज-तारे-चाँद प्रिये अब आ जाओ। कटनी दुष्कर लम्बी काली रात प्रिये अब आ जाओ।। तुमसे धड़के हृदय हमारा, हिय में तुम ही रहती हो, इस...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें