वीरों ने निज रक्तधार से
धरती को नहलाया।
सात समुन्दर पार पहुँचकर
ऊधम खूब मचाया।।
खोकर पुत्र-कन्त माँ-बहनों
ने आँसू न बहाया।
छाती ताने खड़ा तिरंगा
तब जाकर लहराया।।
- राजेश मिश्र
भैया! हाल-चाल कैसा है? बाबू! सब कुछ ठीक-ठाक है।। आय अठन्नी, खर्च रुपइया बरसों पहले ब्याई गइया दूध उठौना ही आता है काम चाय का चल जाता है ...
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