मंगलवार, 12 अगस्त 2025

छोड़कर मुझको न जाओ, प्राण मेरे!

वचन पावन मत भुलाओ, प्राण मेरे!
छोड़कर मुझको न जाओ, प्राण मेरे!

बस तुम्हारे सँग रहूँगी,
तपन-शीतलता सहूँगी।
सुख सभी तुमको समर्पित,
दुख तुम्हारा बाँट लूँगी।।

विकल तन-मन तरस खाओ, प्राण मेरे!
छोड़कर मुझको न जाओ, प्राण मेरे!……(१)

भूख को व्रत जान लूँगी,
तरु तले घर मान लूँगी।
कामनाएँ त्याग सारी
इक तुम्हारा नाम लूँगी।।

साथ ले लो, मान जाओ, प्राण मेरे!
छोड़कर मुझको न जाओ, प्राण मेरे!……(२)

ये महल के भोग सारे,
वसन-भूषन बिन तुम्हारे।
दाहते तन, ले चलो बस
वपुस् वल्कल वस्त्र धारे।।

विरह-दुख में मत जलाओ, प्राण मेरे!
छोड़कर मुझको न जाओ, प्राण मेरे!……(३)

- राजेश मिश्र

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राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।