बाबू! सब कुछ ठीक-ठाक है।।
आय अठन्नी, खर्च रुपइया
बरसों पहले ब्याई गइया
दूध उठौना ही आता है
काम चाय का चल जाता है
मुश्किल मिलना दही-छाछ है।
बाकी सब कुछ ठीक-ठाक है।।१।।
अब जाड़ा ज्यादा लगता है
गर्मी में लिंटर तपता है
बारिश जब होने लगती है
छत थोड़ी चूने लगती है
आठ लोग बस तीन खाट हैं।
बाकी सब कुछ ठीक-ठाक है।।२।।
बीपी, शूगर, हृदय-रोग है
हाँ, अटैक का प्रबल योग है
आँखों की रोशनी घटी है
किडनी केवल एक बची है
खाने में कुछ कम मिठास है।
बाकी सब कुछ ठीक-ठाक है।।३।।
पत्नी ने कब के मुँह फेरे
बात-बात पर आँख तरेरे
बेटी-बेटे सुनते कम हैं
सब कहते कुढ़ते हरदम हैं
नहीं कहीं कुछ बची आस है।
बाकी सब कुछ ठीक-ठाक है।।४।।
जैसे-जैसे उमर चढ़ रही
मोह, लोभ, लालसा बढ़ रही
सुमिरन में मन तनिक न लागे
पल नहिं ठहरे, तुरतहिं भागे
निज कर्मों से ही निराश है।
बाकी सब कुछ ठीक-ठाक है।।५।।
- राजेश मिश्र