पुरी पावनी पूजनीया अयोध्या।
सभी जानते हैं सभी मानते हैं,
सदा राम की वंदनीया अयोध्या।।
जहाँ राम जन्मे जहाँ राम खेले,
जहाँ राम राजें वही है अयोध्या।
रहेगी सदा राम की ही अयोध्या,
सदा राम की ही रही है अयोध्या।।
मैं वह नदिया प्यासी है जो, प्यास बुझाकर सबकी। सावन! आना, हृदय लगाना, बाँहों में भर अबकी।। चाहे जितना भी थकती हूँ, पर अविरल बहती रहती हूँ। प...