गुरुवार, 2 जनवरी 2025

प्रिय! तेरा संदेश मिला है

रीते नैना झर-झर झरते,
झम-झम बरसे सावन।
प्रिय! तेरा संदेश मिला है, 
झूम रहा है तन-मन।।

कितने सावन बीते, सूखे रीते-रीते।
प्रेम-लता को हमने दृग-निर्झर से सींचे।

प्रेम-पुष्प पुनि आज खिला है,
महका है फिर उपवन।
झूम रहा है तन-मन।।१।।

उर ऊसर था मेरा, संग मिला जब तेरा।
उर्वरता भर आयी, आया नया सवेरा।

हरियाली बंजर में छाई,
उदित हुआ मन मधुवन।
झूम रहा है तन-मन।।२।।

विधि को मिलन हमारा, लेकिन रास न आया।
टूटा प्रेम-घरौंदा, हमने साथ बनाया।

चकनाचूर हुए सब सपने,
बिखर गया था जीवन।
झूम रहा है तन-मन।।३।।

- राजेश मिश्र

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राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।