तन-कम्पन मन-नंद न जाई।।
माथे मोर-मुकुट मनभावन,
तन पट-पीत तड़ित सकुचावन,
उर वैजन्ती माल सुहाई।
मनमोहन ने झलक दिखाई।।१।।
झर-झर प्रेम नयन-निर्झर से,
भक्तन-जन-मन-मधुवन सरसे,
अधर मधुर मुरली मुसकाई।
मनमोहन ने झलक दिखाई।।२।।
अतुलित छवि लखि लज्जित रति-पति,
जन निरखत पावत यदुपति-गति,
पाप-ताप-परिताप नसाई।
मनमोहन ने झलक दिखाई।।३।।
- राजेश मिश्र
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