रविवार, 23 नवंबर 2025

रहोगी तुम ही मन में

तुम्हीं थी मन में मेरे, तुम्हीं हो मन में मेरे, 
रहोगी तुम ही मन में,
रहोगी तुम ही मन में।।

मैं कल भी था तेरा ही
मैं अब भी हूँ तेरा ही
यही बस माँगा जग में
रहूँ हरदम तेरा ही

तुम्हीं बहती रहती थी, तुम्हीं बहती रहती हो,
लहू बन मेरे तन में,
लहू बन मेरे तन में।।१।।

तुम्हीं से धड़का यह दिल 
तुम्हीं से धड़क रहा दिल 
रहोगी जब तक दिल में 
तभी तक धड़केगा दिल

तुम्हीं धड़कन थी मेरी, तुम्हीं धड़कन हो मेरी,
रहोगी तुम धड़कन में,
रहोगी तुम धड़कन में।।२।।

नहीं थी तुम जीवन में 
नहीं था कुछ जीवन में 
तुम्हीं सँग सज-धज आईं
बहारें इस जीवन में

तुम्हीं जीवन थी मेरा, तुम्हीं जीवन हो मेरा 
रहोगी तुम जीवन में,
रहोगी तुम जीवन में।।

- राजेश मिश्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

जीवन चौथेपन में दुष्कर

जीवन चौथेपन में दुष्कर, धीरज धरना पड़ता है। मरने से पहले वर्षों तक घुट-घुट मरना पड़ता है।। दुखित व्यक्ति का साथ जगत् में किसको ईप्सित होता ह...