हृदय-कमल पर मँडराती हैं
मधुरिम मधुरस ले जाती हैं
कर-करके मीठी बातें।।१।।
मन मादकता भर जाती हैं
तन को घायल कर जाती हैं
हौले-हौले कर घातें।।२।।
अतिशय निर्दय निष्ठुर निर्मम
कर जाती हैं नयनों को नम
दे जातीं विरहिन रातें।।३।।
- राजेश मिश्र
जीवन चौथेपन में दुष्कर, धीरज धरना पड़ता है। मरने से पहले वर्षों तक घुट-घुट मरना पड़ता है।। दुखित व्यक्ति का साथ जगत् में किसको ईप्सित होता ह...
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