शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

गाँधीजी को एक संक्षिप्त रिपोर्ट

गाँधी तेरे देश का, हो गया बंटाधार।
जित देखो तित व्याप्त है, झूठ और भ्रष्ट्राचार॥
झूठ और भ्रष्ट्राचार, द्वेष, हिंसा, बेईमानी,
शहर-गाँव की बाबा तेरे यही कहानी॥
खूनी हो गई खाकी, चोर हो गई खादी,
बंटाधार हो गया तेरे देश का गाँधी॥

3 टिप्‍पणियां:

राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।