पुरी पावनी पूजनीया अयोध्या।
सभी जानते हैं सभी मानते हैं,
सदा राम की वंदनीया अयोध्या।।
जहाँ राम जन्मे जहाँ राम खेले,
जहाँ राम राजें वही है अयोध्या।
रहेगी सदा राम की ही अयोध्या,
सदा राम की ही रही है अयोध्या।।
इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।
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