शुक्रवार, 6 दिसंबर 2024

परिणय-दिवस सिय-राम का

पावन परम, कलि-मल हरन, जग-जननि का, सुखधाम का,
परिणय-दिवस सिय-राम का।।

मन मुदित, पुलकित जानकी,
मूरति हृदय रख राम की।
दुलहन बनी, सज-धज चली ,
होने सदा श्रीराम की।

हरषत चली, सँकुचत चली, करने वरण छविधाम का।।
परिणय-दिवस सिय-राम का।।१।।

शोभा अमित रघुनाथ की,
छवि कोटि हर रतिनाथ की।
मन मुग्ध निरखि विदेह का,
आँखें सजल सिय मातु की।

आनंद-घन, करुणायतन, रघुवर सकल गुण-ग्राम का।
परिणय-दिवस सिय-राम का।।२।।

रिपुदमन, भरत, लखन लला,
श्रुतिकीर्ति, मांडवि, उर्मिला।
चारों युगल लखि क्यों नहीं,
मिथिला विमोहित हो भला।

यह शुभ लगन, मंगलकरन, हो हेतु जग कल्यान का।
परिणय-दिवस सिय-राम का।।३।।

- राजेश मिश्र 

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राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।