और खाई हर तरफ है।।
सत्यनिष्ठा पुस्तकों में,
बेवफाई हर तरफ है।
प्रेम मानो मर गया है,
बस लड़ाई हर तरफ है।
कुटिल कपटी कुत्सितों की,
वाहवाही हर तरफ है।
जातिगत विद्वेष चहुँदिशि,
जगहँसाई हर ततफ है।
बाँस बरगद कब बना है?
मति नसाई हर तरफ है।
आज पैसा ही सभी कुछ
मान भाई हर तरफ है।
- राजेश मिश्र
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