गुरुवार, 17 सितंबर 2026

मुझको हृदय लगाओ राम

अब तो दरश दिखाओ राम,
मुझको हृदय लगाओ राम।
राम राम जय राजा राम,
राम राम जय सीताराम॥

जन्मों के कर्मों का बंधन
जकड़ा हूँ हे रघुकुलनंदन

इससे मुक्ति दिलाओ राम,
मुझको हृदय लगाओ राम।
राम राम जय राजा राम,
राम राम जय सीताराम॥१।।

क्रोध, लोभ, मद, मोह, पञ्चशर
व्यथित करे कलिकाल भयंकर

इनको दूर भगाओ राम,
मुझको हृदय लगाओ राम।
राम राम जय राजा राम,
राम राम जय सीताराम॥२।।

पाप-ताप तपता मन निशिदिन
कौन कष्ट हर पाये तुम बिन

दारुण दुःख मिटाओ राम,
मुझको हृदय लगाओ राम।
राम राम जय राजा राम,
राम राम जय सीताराम॥३।।

- राजेश मिश्र

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अब तो दरश दिखाओ राम, मुझको हृदय लगाओ राम। राम राम जय राजा राम, राम राम जय सीताराम॥ जन्मों के कर्मों का बंधन जकड़ा हूँ हे रघुकुलनंदन इससे मुक...