रग-रग में कड़वाहट दौड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।।
पग-पग पर विश्वास बनाए रक्खा जिसका जीवन भर,
आश्वासन पल भर में तोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
उसकी असफलताओं पर पग-पग पर मैंने साथ दिया,
खर्पर मेरे सर पर फोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
जब भी प्रश्न करूँ कोई भी खिझियाये-डपटे-डाँटे,
फिर जब वह मुझसे कुछ पूछे, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
द्वेष, उपेक्षा और अनादर जब जीवन भर पाया हो,
तन-मन-वाणी सिक्त इन्हीं से, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
तुम भी तो मेरी बातों पर झुँझलाते ही रहते हो,
प्रेम हृदय का सूख गया जब, मैंकोई शर गर-युत यदि छोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
रग-रग में कड़वाहट दौड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।।
पग-पग पर विश्वास बनाए रक्खा जिसका जीवन भर,
आश्वासन पल भर में तोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
उसकी असफलताओं पर पग-पग पर मैंने साथ दिया,
खर्पर मेरे सर पर फोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
जब भी प्रश्न करूँ कोई भी खिझियाये-डपटे-डाँटे,
फिर जब वह मुझसे कुछ पूछे, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
द्वेष, उपेक्षा और अनादर जब जीवन भर पाया हो,
तन-मन-वाणी सिक्त इन्हीं से, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
तुम भी तो मेरी बातों पर झुँझलाते ही रहते हो,
प्रेम हृदय का सूख गया जब, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
शर - बाण
गर-युत - विष बुझा
खर्पर - ठीकरा
- राजेश मिश्र
मीठा कैसे बोलूँ।
शर - बाण
गर-युत - विष बुझा
खर्पर - ठीकरा
- राजेश मिश्र