सोमवार, 2 नवंबर 2026

मैं मीठा कैसे बोलूँ

कोई शर गर-युत यदि छोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
रग-रग में कड़वाहट दौड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।।

पग-पग पर विश्वास बनाए रक्खा जिसका जीवन भर,
आश्वासन पल भर में तोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।

उसकी असफलताओं पर पग-पग पर मैंने साथ दिया,
खर्पर मेरे सर पर फोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।

जब भी प्रश्न करूँ कोई भी खिझियाये-डपटे-डाँटे,
फिर जब वह मुझसे कुछ पूछे, मैं मीठा कैसे बोलूँ।

द्वेष, उपेक्षा और अनादर जब जीवन भर पाया हो,
तन-मन-वाणी सिक्त इन्हीं से, मैं मीठा कैसे बोलूँ।

तुम भी तो मेरी बातों पर झुँझलाते ही रहते हो,
प्रेम हृदय का सूख गया जब, मैंकोई शर गर-युत यदि छोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।
रग-रग में कड़वाहट दौड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।।

पग-पग पर विश्वास बनाए रक्खा जिसका जीवन भर,
आश्वासन पल भर में तोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।

उसकी असफलताओं पर पग-पग पर मैंने साथ दिया,
खर्पर मेरे सर पर फोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।

जब भी प्रश्न करूँ कोई भी खिझियाये-डपटे-डाँटे,
फिर जब वह मुझसे कुछ पूछे, मैं मीठा कैसे बोलूँ।

द्वेष, उपेक्षा और अनादर जब जीवन भर पाया हो,
तन-मन-वाणी सिक्त इन्हीं से, मैं मीठा कैसे बोलूँ।

तुम भी तो मेरी बातों पर झुँझलाते ही रहते हो,
प्रेम हृदय का सूख गया जब, मैं मीठा कैसे बोलूँ।

शर - बाण
गर-युत - विष बुझा
खर्पर - ठीकरा

- राजेश मिश्र
 मीठा कैसे बोलूँ।

शर - बाण
गर-युत - विष बुझा
खर्पर - ठीकरा

- राजेश मिश्र

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कोई शर गर-युत यदि छोड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ। रग-रग में कड़वाहट दौड़े, मैं मीठा कैसे बोलूँ।। पग-पग पर विश्वास बनाए रक्खा जिसका जीवन भर, आश्व...