शनिवार, 13 जनवरी 2024

अइलं अवध रघुराई

अइलं अवध रघुराई, नगर-घर बाजे बधाई।
सुर-नर-मुनि हरषाई, नगर-घर बाजे बधाई।।

रामजी अइलं, लछिमन अइलंऽ
देखि सिया के नयन जुड़इलंऽ
भरत मिलेलं हहाई, नगर-घर बाजे बधाई।
अइलं अवध रघुराई, नगर-घर बाजे बधाई।।

लखन-सहोदर मगन निहारंऽ
ढरकत अंसुवन चरण पखारंऽ
सब सुधि-बुथि बिसराई, नगर-घर बाजे बधाई।
अइलं अवध रघुराई, नगर-घर बाजे बधाई।।

भई उर्मिला-गति बावरि सी
चउदह बरस की अंखियां तरसीं
हरषित तीनों माई, नगर-घर बाजे बधाई।
अइलं अवध रघुराई, नगर-घर बाजे बधाई।।

- राजेश मिश्र 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

बिजली रानी! क्या मनमानी?

बिजली रानी! क्या मनमानी? कितना हमें सताती हो! रहना मुश्किल बिना तुम्हारे, छोड़ हमें क्यों जाती हो? बिल तो हम पूरा देते हैं, टाइम पर भर आते ह...