बुधवार, 16 अक्टूबर 2024

हम राम-कृष्ण की सन्तानें

हम राम-कृष्ण की सन्तानें, मन्दिर में उन्हें सजायेंगे,
गुण उनके नहिं अपनायेंगे।

खोखली हमारी पूजा है,
खोखली हमारी भक्ति है।
खोखली हमारी बातें हैं,
खोखली हमारी शक्ति है।

जिनको आदर्श बनायेंगे, उनके पीछे नहिं जायेंगे,
गुण उनके नहिं अपनायेंगे।।१।।

कब राम धर्म से विमुख हुए?
कब कृष्ण कर्म से मुँह मोड़े।
कब वे अपनों के साथ न थे?
कब एकाकी लड़ता छोड़े?

आस्था का राग अलापेंगे, झूठी श्रद्धा दिखलायेंगे।
गुण उनके नहिं अपनायेंगे।।२।।

यदि सचमुच उनके वंशज हो!
उन आदर्शों के पालक हो!
अब उठो! उठो! उठ युद्ध करो,
तुम ही अरि-दल संहारक हो।

संग्राम करो, प्रतिमान बनो, युग-युग तक सब गुण गायेंगे।
सब मस्तक तुम्हें नवायेंगे।।३।।

- राजेश मिश्र 

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राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।