सोमवार, 14 अक्टूबर 2024

अब भी यदि चुप रह जाओगे

अब भी यदि चुप रह जाओगे,
जीवन भर तुम पछताओगे।।

जो इक बार चला जाता है,
समय लौट कर कब आता है?
निर्णय जब न लिए जाते हैं,
परिणामों से पछताते हैं।
अवसर स्वर्णिम खो जायेगा,
दुविधा में यदि रह जाओगे।
अब भी यदि चुप रह जाओगे,
जीवन भर तुम पछताओगे।।१।।

जिसका दम्भ सदा भरते हो,
कहाँ गई वह शक्ति तुम्हारी?
इष्ट निरादृत सतत हो रहे,
कहाँ गई वह भक्ति तुम्हारी?
बच्चे कल जब प्रश्न करेंगे,
बोलो, मुँह क्या दिखलाओगे?
अब भी यदि चुप रह जाओगे,
जीवन भर तुम पछताओगे।।२।।

आज प्राण बच भी जायें तो
आगे क्या होगा? सोचा क्या?
संस्कृति-धर्म विनष्ट हुए तो,
गोत्र अवित होगा? सोचा क्या?
तर्पण-श्राद्ध भूल ही जाना,
तृषित-अतृप्त चले जाओगे।
अब भी यदि चुप रह जाओगे,
जीवन भर तुम पछताओगे।।३।।

- राजेश मिश्र

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राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।