गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024

ज्योति जगाओ मैया! ज्योति जगाओ

ज्योति जगाओ मैया! ज्योति जगाओ।
मनसि प्रेम की ज्योति जगाओ।।

भारत माता के उपवन में,
भाँति-भाँति के कुसुम खिले हैं।
सबके अपने रूप-रंग हैं,
अरु विशेष गुण-गंध मिले हैं।

सँग महकाओ मैया! सँग महकाओ।
एक सूत्र में सँग महकाओ।।१।।

कौन श्रेष्ठ है? निम्न कौन है?
द्वेष-घृणा सब दूर करो माँ।
सब सुत तेरे, भिन्न कौन है?
मन में प्रेम अपूर्व भरो माँ।

भेद मिटाओ मैया! भेद मिटाओ।
ऊँच-नीच का भेद मिटाओ।।२।।

कोई निर्बल, दुखी नहीं हो,
सभी सुखी हों, सभी बली हों।
सब संपन्न, धर्म-पथ-गामी,
गुणनिधान हों, नहीं छली हों।

दीप जलाओ मैया! दीप जलाओ।
हृदय ज्ञान का दीप जलाओ।।३।।

- राजेश मिश्र 

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