मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

तुमको खोकर खो जायेंगे

गीत हमारे उपजे तुमसे तुममें ही लय हो जायेंगे।।
तुमको पाकर पाया खुद को तुमको खोकर खो जायेंगे।।

तुमसे ही प्रातः होती है 
रात तुम्हारे सँग सोती है
रवि-राकेश तुम्हीं से भासित
संध्या भी रक्तिम होती है 

तुमसे ही उगते हैं तारे बिन तुम सब गुम जायेंगे।
तुमको पाकर पाया खुद को तुमको खोकर खो जायेंगे।।१।।

तुमसे कलियाँ मुसकाती हैं
विकसित होकर इतराती हैं
हँसता है यह मधुमय मधुबन
भृंगावलियाँ भी गाती हैं

सुमन-सुमन सुरभित तुमसे तुम बिन बिन सौरभ हो जाएंगे।
तुमको पाकर पाया खुद को तुमको खोकर खो जायेंगे।।

तुमसे ही पंछी गाते हैं 
पंख तुम्हीं से बल पाते हैं 
और तुम्हारा ही संबल ले
नभ में निर्भय मंडराते हैं

तुमसे ही जगमग जीवन है तुम बिन शव सम हो जायेंगे।
तुमको पाकर पाया खुद को तुमको खोकर खो जायेंगे।।

- राजेश मिश्र

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राम

इन्द्रियों की पहुँच से परे राम हैं, किंतु कण-कण जगत के भरे राम हैं। पातकी घोरतम नाम ही ले तरें, कर-कमल नित्य शर-धनु धरे राम हैं।।