सत्य सनातन सदा सुरक्षित वीरों के बलिदानों से।।
इस्लामी आँधी के आगे झुके नहीं वे तने रहे।
नमन है गुरु, गुरु-पुत्रों को जो धर्म-धुरंधर बने रहे।
हे लखन! उठो प्रिय भ्रात प्रात अब होने वाली है।। शयित उषा-दृग खुलने वाले लाली छाती होगी। पुरखों का आशीष समेटे किरणें आती होंगी। बीती घन काली ...
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