मंगलवार, 29 सितंबर 2026

सुनो सुते!

सुनो सुते! जब जीवन-पथ पर तुम आगे जाओगी।
प्रतिदिन नये-नये लोगों से पग-पग टकराओगी।।
सीढ़ी-सीढ़ी सँभल-सँभलकर सावधान हो चढ़ना।
निर्भय होकर निज चयनित पथ पर तुम आगे बढ़ना।।

कङ्कड़-पत्थर हर रस्ते पर अनायास मिलते हैं। 
कभी-कभी ठोकर खाकर हम मुँह के बल गिरते हैं।।
जब भी गिरना, दूने बल से पुनः खड़ी हो जाना।
घाव लगे रो लेना, लेकिन फिर से तुम मुस्काना।।

रस्ते-रस्ते व्याध मिलेंगे छुपकर घात लगाये।
तरह-तरह की लालच लेकर इन्द्रजाल फैलाये।
चकाचौंध से कहीं लुभाते, कहीं साधु बन जाते।
नये-नये नित रूप बदलते, नव-नव स्वाँग रचाते।

तुम्हें पता है क्या करना है, कैसे तुम्हें निपटना।
कब तनकर सम्मुख होना है, कब है पीछे हटना।।
उस पल जो भी निर्णय लोगी, साथ हमें पाओगी। 
वही सही पथ होगा निश्चित, जिस पथ तुम जाओगी।।

- राजेश मिश्र

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