मंगलवार, 29 सितंबर 2026

ज्योतिपुञ्ज उतरी…

ज्योतिपुञ्ज उतरी…
गगन से ज्योतिपुञ्ज उतरी।।

ललित लालिमा लसत कमल-पद 
मर्दित कर निशि-अन्धकार-मद
अप्रतिम अचला अङ्ग-अङ्ग शुभ 
स्वर्ण-प्रभा बिखरी…

धरा पर स्वर्ण-प्रभा बिखरी।
गगन से ज्योतिपुञ्ज उतरी।।१।।

खग-कुल कलरव जन-मन मोहत
हिमगिरि-तन पीताम्बर सोहत 
पग-पग छम-छम मृदु मादक ध्वनि 
कर्ण-गुहा पसरी…

मदिर ध्वनि कर्ण-गुहा पसरी।
गगन से ज्योतिपुञ्ज उतरी।।२।।

जन-जीवन पालक परिपोषक
मन-तोषक, सब दुख-अवशोषक 
कुम्हलाई कलिकायें प्रस्फुट
अधर-अधर निखरीं…

प्रस्फुटित अधर-अधर निखरीं।
गगन से ज्योतिपुञ्ज उतरी।।३।।

- राजेश मिश्र

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ज्योतिपुञ्ज उतरी…

ज्योतिपुञ्ज उतरी… गगन से ज्योतिपुञ्ज उतरी।। ललित लालिमा लसत कमल-पद  मर्दित कर निशि-अन्धकार-मद अप्रतिम अचला अङ्ग-अङ्ग शुभ  स्वर्ण-प्रभा बिखरी...