शनिवार, 26 सितंबर 2026

हम तुम्हरी कठपुतली कान्हा!

हम तुम्हरी कठपुतली कान्हा! 
जैसे चाहो नाचेंगे।
जब तक वाणी में बल होगा, 
तुम्हरी महिमा बाँचेंगे।।

बँधेंगे कैसे कर्मबन्ध से,
काम तुम्हारा करते हैं।
परिचारक तुम ही बतलाओ, 
निज मन की कब करते हैं?

कर देंगे जो कुछ कह दोगे,
पुण्य-पाप क्यों जाँचेंगे?
जब तक वाणी में बल होगा, 
तुम्हरी महिमा बाँचेंगे।।१।।

सुख-दुख की किसको चिन्ता है, 
जैसे रख लो, रह लेंगे।
धूप-छाँव जो भी आएगी, 
हँस-हँसकर सब सह लेंगे।

जो भी धुन मुरली छेड़ेगी, 
मत्त उसी पर नाचेंगे। 
जब तक वाणी में बल होगा, 
तुम्हरी महिमा बाँचेंगे।।२।।

किङ्कर को क्यों कर चिन्ता हो, 
कल की, आज और कल की। 
ऊपर से स्वामी तुम जैसा, 
सुधि लेता जो पल-पल की।

हम जैसों की किसे पड़ी है, 
तुमको ही सब जाँचेंगे।
जब तक वाणी में बल होगा, 
तुम्हरी महिमा बाँचेंगे।।३।।

- राजेश मिश्र

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