बचपन निराश क्यों है?
सारे सम्बन्धों में,
इतनी खटास क्यों है?
बेटे-बेटियों बीच,
माता उदास क्यों है?
रात्रि की नीरवता में,
मौन अट्टहास क्यों है?
आजीवन दूर रहा,
आज फिर पास क्यों है?
बुझ चुकी आँखों में,
सहसा प्रकाश क्यों है?
ठुकराया बार-बार,
उसी से आस क्यों है?
गीदड़ों की गोष्ठी में,
बहुत उल्लास क्यों है?
सुख-सम्पत्ति सम्पन्न,
जलधि में प्यास क्यों है?
नियति के अधर-द्वय पर,
यह कुटिल हास क्यों है?
- राजेश मिश्र
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