सोमवार, 25 नवंबर 2024

नित खींच-तान में फँसे लोग

नित खींच-तान में फँसे लोग।
स्वार्थ-जम्बाल में धँसे लोग।।

गाँवों की पीड़ा क्या समझें,
आजन्म शहर में बसे लोग।।

मिलने पर महका जाते हैं,
मलय-सा शिला पर घिसे लोग।।

सबको सद्य भाँप लेते हैं,
जीवन-चक्की में पिसे लोग।।

दुख दूसरों का समझ लेते हैं,
कृतान्त-पाश में कसे लोग।।

चित्त से उतर ही जाते हैं
रंग उतरते, मन-बसे लोग।। 

रक्त से सदा सींचा जिसने,
उसी को सर्प बन डँसें लोग।।

मदमस्त झूमते पी-पीकर
जातिगत अहं के नशे लोग।।

जम्बाल = कीचड़
कृतान्त = भाग्य 

- राजेश मिश्र 

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