किंतु अभिमान से वह अछूता रहा।
राष्ट्रहित-धर्महित सर्वदा बलि हुआ,
नित्य अपमान से वह अछूता रहा।।
स्वारथी जातिगत-द्वेष भड़का रहे,
क्षुद्र अभियान से वह अछूता रहा।
सोच उसकी सनातन सनातन रही,
स्वार्थ-अज्ञान से वह अछूता रहा।।
- राजेश मिश्र
वेद-शास्त्र सारे ग्रन्थों ने हमको यह बतलाया है। धर्म जगत में परम अहिंसा बार-बार दुहराया है।। सभी चराचर जीवों का हम सदा उचित सम्मान करें। प्र...
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