शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

ब्राह्मण

स्वाभिमानी सदा से रहा ब्राह्मण, 
किंतु अभिमान से वह अछूता रहा।
राष्ट्रहित-धर्महित सर्वदा बलि हुआ, 
नित्य अपमान से वह अछूता रहा।।
स्वारथी जातिगत-द्वेष भड़का रहे, 
क्षुद्र अभियान से वह अछूता रहा। 
सोच उसकी सनातन सनातन रही, 
स्वार्थ-अज्ञान से वह अछूता रहा।।

- राजेश मिश्र

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