गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

छोड़ मत जाना प्रिये

मैं अकेला घुट मरूँगा छोड़ मत जाना प्रिये।
बिन तुम्हारे क्या करूँगा छोड़ मत जाना प्रिये।।

एक तुम बिन यूँ लगे ज्यों सून यह जग हो गया,
बाकियों का क्या करूँगा छोड़ मत जाना प्रिये।

तुम चहकती चंद्रिमा सी तृप्त कर जाती मुझे,
रात दिन तुम बिन जलूँगा छोड़ मत जाना प्रिये।

व्यग्रता के सब पलों में शांति की प्रतिमूर्ति तुम,
तुम बिना घुटता रहूँगा छोड़ मत जाना प्रिये।

गुनगुनाती खींच लेती चित्त की हर पीर तुम,
दर्द कैसे सा सकूंगा छोड़ मत जाना प्रिये।

जानते सब जान मेरी बस बसे तुममें सदा,
प्राण बिन कैसे जिऊँगा छोड़ मत जाना प्रिये।

- राजेश मिश्र 

मापनी: 
2122 2122 2122 212

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