शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

रघुवर कब आओगे?

नैऩन नीर स्रवत है निशिदिन, रघुवर कब आओगे?
मन बदला, तन छूट गया तो प्रभुवर पछताओगे।।

जनम-जनम से राह निहारूँ
पल-पल केवल तुम्हें पुकारूँ
अब तो दर्शन दे दो राघव, कब तक तड़पाओगे?
मन बदला…(१)

कण-कण ढूँढ़ूँ, क्षण-क्षण ढूँढ़ूँ
अचला अम्बर उडुगण ढूँढ़ूँ
एक झलक को तरस रहा मन, छुपकर क्या पाओगे?
मन बदला…(२)

युग-युग भटका सरबस खोई
हृदय न भावे दूजा कोई 
बस तुमसे ही लगन लगी है, कह दो अपनाओगे? 
मन बदला…(३)

- राजेश मिश्र 

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