मन बदला, तन छूट गया तो प्रभुवर पछताओगे।।
जनम-जनम से राह निहारूँ
पल-पल केवल तुम्हें पुकारूँ
अब तो दर्शन दे दो राघव, कब तक तड़पाओगे?
मन बदला…(१)
कण-कण ढूँढ़ूँ, क्षण-क्षण ढूँढ़ूँ
अचला अम्बर उडुगण ढूँढ़ूँ
एक झलक को तरस रहा मन, छुपकर क्या पाओगे?
मन बदला…(२)
युग-युग भटका सरबस खोई
हृदय न भावे दूजा कोई
बस तुमसे ही लगन लगी है, कह दो अपनाओगे?
मन बदला…(३)
- राजेश मिश्र
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