हो रहा इज़हार मन में नैन तेरे बोलते हैं।।
थरथराते होंठ चुप हैं लाज के मारे भले ही,
कर रही स्वीकार मन में नैन तेरे बोलते हैं।
यूँ दिखाती हो नहीं कुछ फर्क मेरे रूठने से,
चल रहा मनुहार मन में नैन तेरे बोलते हैं।
इस जगत में हर कदम पर प्यार को धोखा मिला है,
छल नहीं तृण-भार मन में नैन तेरे बोलते हैं।
देख ले कोई मुझे जो प्रेम भरकर निज नज़र में,
ठान ले तू रार मन में नैन तेरे बोलते हैं।
दुख किसी को दे सके तू है नहीं संभव प्रिये यह,
प्यार ही साकार मन में नैन तेरे बोलते हैं।
- राजेश मिश्र
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