मंगलवार, 24 दिसंबर 2024
छलक रहा तेरा यौवन
शनिवार, 21 दिसंबर 2024
जब से तुमने दामन छोड़ा
बुधवार, 11 दिसंबर 2024
वंश-वृक्ष
शनिवार, 7 दिसंबर 2024
मेरे जीवनसाथी
तुमसे ही हैं ये गीत मेरे।।
जीवन के पतझड़ की बहार।
निर्झर नयनों का पुलक प्यार।
मृदु वचन सुभग संगीत तेरे।।
तुमसे ही हैं ये गीत मेरे।।
काले केशों की घन छाया।
तुमसे ही हैं ये गीत मेरे।।
धुन छेड़ो जिसमें प्यार-प्यार।
कर दो बेसुध हे मीत मेरे।।
तुमसे ही हैं ये गीत मेरे।।
हृदयेशा! मन:प्रणीत मेरे।।
तुमसे ही हैं ये गीत मेरे।।
शुक्रवार, 6 दिसंबर 2024
परिणय-दिवस सिय-राम का
बुधवार, 4 दिसंबर 2024
ओ रे निर्मोही! छोड़ चला किस देश?
कपटी बुद्ध हुआ जाता है
रविवार, 1 दिसंबर 2024
मत मार मेरे अल्हड़पन को
शनिवार, 30 नवंबर 2024
रे बटोही! धीर धर
शुक्रवार, 29 नवंबर 2024
सूरज के ढलने पर ही
बुधवार, 27 नवंबर 2024
गूँजती हो
सोमवार, 25 नवंबर 2024
पंछी रे! उड़ जा उन्मुक्त गगन में
सबके अपने अहंकार हैं
जब कोई पत्थर बरसाए
नित खींच-तान में फँसे लोग
शनिवार, 23 नवंबर 2024
घर छोड़ चला है पंछी
खो बचपन, लड़ने जीवन की
होड़ चला है पंछी…
घर छोड़ चला है पंछी।
माँ का आँचल, पितु का साया
अब छूटे जाते हैं।
करुण स्नेह के निर्झर नयनों
से फूटे जाते हैं।
प्रेम-निर्झरी की धारा को
मोड़ चला है पंछी…
घर छोड़ चला है पंछी।।१।।
शक्ति-युक्त पंखों को पाकर
चला विशाल गगन में।
विश्व-विजय करने की इच्छा
पाले अपने मन में।
नये जगत से अपना नाता
जोड़ चला है पंछी…
घर छोड़ चला है पंछी।।२।।
बिना सहारे, निज पंखों की
ताकत अब तौलेगा।
मात-पिता-गुरुजन शिक्षा से
नये द्वार खोलेगा।
निर्भय हो, मन के भय-भ्रम को
तोड़ चला है पंछी…
घर छोड़ चला है पंछी।।३।।
- राजेश मिश्र
गुरुवार, 21 नवंबर 2024
बचपन निराश क्यों है
शनिवार, 16 नवंबर 2024
भींगी-भींगी आँखों से, तुमको जाते देखा था
आभा तेरी आती है
बुधवार, 13 नवंबर 2024
ढूँढ़ूँ मैं प्रिय राम कहाँ हो?
मंगलवार, 12 नवंबर 2024
साथ-साथ चलते रहना है
सोमवार, 11 नवंबर 2024
हिंदू-हिंदू भाई-भाई
तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्।।
रविवार, 10 नवंबर 2024
छिद्रान्वेषी
शुक्रवार, 8 नवंबर 2024
बांग्लादेश की त्रासदी
रविवार, 3 नवंबर 2024
बहनें पढ़-लिख फेमीनिस्ट हो गईं
शुक्रवार, 1 नवंबर 2024
तुम आए नवजीवन आया
हे राम! बताओ अब हमको कैसी पहली दीवाली थी
गुरुवार, 31 अक्टूबर 2024
आखिर कब तक सहते जाएं कुलघाती जयचन्दों को
मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024
अग्नि हूँ मैं
रविवार, 27 अक्टूबर 2024
सुनो जाहिलों!
रविवार, 20 अक्टूबर 2024
तुम सुखद वृष्टि बन आई
शनिवार, 19 अक्टूबर 2024
प्रीत तेरी मन बसी
शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024
साथ-साथ चलना होगा
बुधवार, 16 अक्टूबर 2024
कब तक खैर मनाओगे
हम राम-कृष्ण की सन्तानें
मंगलवार, 15 अक्टूबर 2024
चलो-चलो कुछ गीत लिखेंगे
सोमवार, 14 अक्टूबर 2024
अब भी यदि चुप रह जाओगे
शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024
रावण को जल जाने दो
जगदम्बायै नमो नमः
गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024
सबको इक दिन जाना होगा
ज्योति जगाओ मैया! ज्योति जगाओ
मंगलवार, 8 अक्टूबर 2024
माँ का ध्यान करो
सोमवार, 7 अक्टूबर 2024
माई सपने में आई
रविवार, 6 अक्टूबर 2024
अंबे! यह वरदान दो।
शनिवार, 5 अक्टूबर 2024
आओ मैया! घर में आओ
शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2024
हे अंबे! जयकार तुम्हारा
गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024
यह मन बिलकुल धीर नहीं है
जैसे-जैसे वय बढ़ती है
हम तेरे शरणागत अंबे!
सोमवार, 30 सितंबर 2024
चूम लो
दोहे
शनिवार, 28 सितंबर 2024
अवध में, आये हैं रघुराई
तन-मन हरषें, अँखियाँ बरसें,
चलहुँ दरस को भाई।
अवध में, आये हैं रघुराई।।
चहक रहे हैं पसु-पक्षी सब, कोयल मंगल गावैं।
दादुर टर-टर मंत्र उचारें, मेह नेह बरसावैं।
पवन सनन-सन चहुँ दिसि नाचत,
अति अनंद उमगाई।
अवध में, आये हैं रघुराई।।१।।
कली-कली खिल फूल हुई हैं, रंग-सुगंध बिखेरें।
धरती हरी-भरी हो मचले, मन आमोद घनेरे।
मधुकारिन् मधुपर्क बनावैं,
हरि कहुँ भोग लगाई।
अवध में, आये हैं रघुराई।।२।।
डगर-डगर मन मगन झूमतीं, ताल-नदी हरषाने।
कूप-पोखरी उमग रहे हैं, बिटप-लता हुलसाने।
धाये पुरजन, भरत-शत्रुघन,
बिह्वल तीनों माई।
अवध में, आये हैं रघुराई।।३।।
- राजेश मिश्र
गुरुवार, 26 सितंबर 2024
भारत माँ के शीलभंग की म्लेच्छों की तैयारी है
प्रिय! तू तो अति हरजाई है
बुधवार, 25 सितंबर 2024
कवि नहीं हूं
दुख तभी होगा पथिक! जब चाह होगी
मंगलवार, 24 सितंबर 2024
लक्ष्य-वेध हित चलना होगा
सोमवार, 23 सितंबर 2024
बचवा भुखाइल बा
रविवार, 22 सितंबर 2024
ईश्वर का वरदान है बेटी
शनिवार, 21 सितंबर 2024
अपनी अलकों से कह दो तुम
शुक्रवार, 20 सितंबर 2024
अब बहुत हुआ, अब और नहीं
गुरुवार, 19 सितंबर 2024
हे मोहन मुरली वाले
रविवार, 15 सितंबर 2024
बरबस समाधि लग जाती है
शनिवार, 14 सितंबर 2024
आखिर अंकुर फूट पड़ा है
शुक्रवार, 13 सितंबर 2024
पाप ई तुहार बा
सुनलऽ हमार कब तूंऽ? कइसे तुहंके रोकीं?
पाप ई तुहार बा तऽ, हम काहें भोगीं?
कब हम कहलीं तुहंसे, माई-बाप छोड़ि दऽ?
भाई-बहिनि-संगी-साथी, सबसे मुंह मोड़ि लऽ?
जिद ई तुहार रहल, तुहीं हव दोषी।
पाप ई तुहार बा तऽ, हम काहें भोगीं?
लइके तऽ कहलं नाहीं, अलगे हमके पालऽ।
सीना कऽ बोझ अपने, खुद ही संभालऽ।
अंड़सा तऽ तुहंके कइसे, उनहन के कोसीं?
पाप ई तुहार बा तऽ, हम काहें भोगीं?
अबहिन भी एतना साजन, बिगड़ल नऽ बाट।
माई-बाप हवं आखिर, भलहीं ऊ डांटं।
पंउआं पे सीस धरतऽ, राखि लिहंऽ गोदी।
पाप ई तुहार बा तऽ, हम काहें भोगीं?
- राजेश मिश्र
संगठन की शक्ति
शुक्रवार, 6 सितंबर 2024
कहो कान्हा? करोगे कैसे तुम उद्धार?
बुधवार, 4 सितंबर 2024
छू गई वह एक मृदु मुस्कान से
रविवार, 1 सितंबर 2024
उपजी न कहीं कविता मन में
शुक्रवार, 30 अगस्त 2024
रो मत बेटी!
बँटोगे तो कटोगे
गुरुवार, 29 अगस्त 2024
नेवान कइसे होई
देश क्या बचे?
मंगलवार, 27 अगस्त 2024
सुदामा की व्यथा
लाज राखो प्रभु मोर
रविवार, 11 अगस्त 2024
जागो हिंदू, जागो!
मंगलवार, 9 अप्रैल 2024
अब तो दरस दिखाओ मेरी मैया
शुक्रवार, 19 जनवरी 2024
आओगे जब तुम रामलला
ठुमुकि चलत रघुराई
बुधवार, 17 जनवरी 2024
राम भजो मन
राम घर आये हैं
रविवार, 14 जनवरी 2024
कहाँ हैं रामलला?
दरस दिये रघुराई
शनिवार, 13 जनवरी 2024
आये राघव सरकार
अइलं अवध रघुराई
शुक्रवार, 12 जनवरी 2024
राम जी आयेंगे
आज राम घर आयेंगे
जीवन चौथेपन में दुष्कर
जीवन चौथेपन में दुष्कर, धीरज धरना पड़ता है। मरने से पहले वर्षों तक घुट-घुट मरना पड़ता है।। दुखित व्यक्ति का साथ जगत् में किसको ईप्सित होता ह...
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लन्दन के हीथ्रो एअरपोर्ट से जैसे ही विमान ने उड़ान भरी, श्याम का दिल बल्लियों उछलने लगा. बचपन की स्मृतियाँ एक-एक कर मानस पटल पर उभरने लगीं और...
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बीते पलों के अफ़साने लिख रहा हूँ। जिंदगी मैं तेरे तराने लिख रहा हूँ॥ हालत कुछ यूँ कि वक्त काटे नहीं कटता, वक्त काटने के बहाने लिख रहा हूँ॥...
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मनुज स्वभाव, नहीं अचरज है। मानव हैं हम, द्वेष सहज है।। निर्बल को जब सबल सताए, वह प्रतिकार नहीं कर पाए, मन पीड़ा से भर जाता है, द्वेष हृदय घ...